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lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र

lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र 

lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र
lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र 




lailatul Qadr की रात हमारे लिए बहुत ही ख़ास रात है जो रमज़ान के दौरान आखरी 10 दिनों के अंदर आती है। यह रात हमारे लिए बहुत बड़ी अहमियत रखती है और इसे इबादत, दुआएं , मग़फि़रत और अपने रब को राज़ी करने के लिए ख़ास माना जाता है। इसे रमज़ान के आख़िरी दस दिनों में तलाश किया जाता है इसी रात में क़ुरान का नजू़ल शुरू हुवा! रमज़ान के महीने में आख़री अशरा (दस दिन) इबादत के लिए बहुत खास है। इन दस दिनों में 21, 23, 25, 27 और 29 रमजान की रात काफी अहमियत रखती है। इस लिए हमें इन रातों का इबादत के लिए खास एहतमाम करना चाहिए।इन्हीं रातों में एक बहुत ही अहम इबादत की रात लैलतुल कद्र यानी शब-ए-कद्र की रात होती है। जो इबादत और मगफिरत की दुआ के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। और इन्ही ताक रातों में कोई एक रात शब ए कद्र की रात होती है जिसकी हमे तलाश करनी है।






    अल्लाह सुबहा़न व तआ़ला क़ुरआन ए मजीद मैं फ़रमाता है :
    “यक़ीनन हम ने इसे (क़ुरआन) को शब ए क़द्र मैं नाज़िल फ़रमाया, तुम क्या समझे के शब ए क़द्र क्या है? शब ए क़द्र एक हज़ार "महीनों" से बेहतर है, उस (मैं हर काम) के सरंजाम देने को अपने रब के हुक्म से फ़रिश्ते और रूह उतरते हैं, ये रात सारासर सलामती की होती है और फ़ज्र के तुलू होने तक (रहती है)।"
    [सुरह क़द्र 97, आयत 1-5]


    रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
    "ऐ लोगो ये बरकत वाला महीना तुम्हारे नज़दीक आ रहा है और अल्लाह ने ये हु़क्म दिया है की तुम इस महीने मैं रोज़े रखो। इस महीने में जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं और शैतानो को जकड़ दिया जाता है। और इस महीने में एक रात है जो हज़ार महीनों से बेहतर है। जो इस महीने में अल्लाह की बरकत से महरूम रहा वो हर भलाई से महरूम रहा।”
    [मुसनद अहमद - 7148]

    लैलतुल क़द्र का वक़्त:

    lailatul Qadr रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातो मैं तलाश करनी चाहिए।
    आयशा रज़ि अल्लाहू अन्हा रिवायत करती हैं की रसूल अल्लाह सलअल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "रमज़ान की आख़िरी अशरे की ताक़ रातो मैं लैलतुल क़द्र तलाश करो।"
    [सही बुख़ारी : 2017]


    इससे ये पता चलता है की आख़िरी 10 ताक रातो में (यानी 21,23,25,27और 29) एहतीमाम के साथ इबादत करनी चाहिए और सिर्फ़ 27 को ऐतकाफ़ नई करनी चाहिए।
    रमज़ान के आख़िरी आशरे में अपने अहल ओ अयाल को इबादत के लिए ख़ुशी तरग़ीब दिलाना मसनुन है:
    इसका मतलब सिर्फ़ ख़ुद ही नही बल्कि अपने बच्चों को और अपने घर वालो को इस की तरफ़ तवज्जो दिलाना चाहिए:
    हज़रत आयशा रज़ि अल्लाहू अन्हा फ़रमाती है की रमज़ान के आख़िरी आशरे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बाक़ी दिनों की निस्बत इबादत में ज़्यादा कोशिश फ़रमाते।
    [सुनन इब्ने माजाह: 1767]
    हज़रत आयशा रज़ि अल्लाहू अन्हा फ़रमाती हैं के जब रमज़ान के आख़िरी 10 दिन शुरू होते तो रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इबादत के लिए कमर-बस्ता हो जाते (कमर कस लेते), रातो को जागते और अपने अहल ओ अयाल को भी जगाते।
    [सुनन इब्ने माजाह : 1768]

    लैलतुल क़द्र में की जाने वाली इबादत:



    lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र
    Tahajjud,Taraweeh,Qayam e lail 




    lailatul Qadr में इबादत ग़ुज़िश्ता गुनाहो की मग़फ़िरत का बाइस है:
    अबु हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु रिवायत करते हैं की रसूल अल्लाह सलअल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसने लैलतुल क़द्र मैं ईमान के साथ सवाब की नियत से क़ियाम किया, उसके ग़ुज़िश्ता गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"
    [सही बुख़ारी : 2014]
    lailatul Qadr में सारी नेकी या इबादत हम करते हैं उस में से बेहतरीन है तवील क़याम। लेकिन जो ये ना कर सके वो बैठ कर ज़िक्र और अज़कार करे।

     लैलतुल क़द्र में की जाने वाली दुआ:

    शब ए क़द्र की ता़क़ रातों में एक ख़ास दुआ़ को पढ़ने का हु़क्म है। इस दुआ़ की बहुत बड़ी फ़जी़लत है।
    उम्मुल मोमेनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा रज़ी अल्लाहो अन्हा ने फ़रमाया:-
    या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम अगर शब-ए -क़द्र मिल जाए तो क्या दुआ करूँ ? तो आप सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने फ़रमाया, कहो
     
    اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي 

    “अल्लाह हुम्मा इन्नका अफ़ुवून तुहिब्बुल अफ़वा फअफ़ू अन्नी”
    तर्जुमा :- या अल्लाह तू मुआफ़ करने वाला है और मुआफ़ करने को पसंद करता है इसलिए मुझे मुआफ़ फ़रमा,
    {सुनन इब्न-ए-माजा जिल्द 3 हदीस 731 सनद सही}
    {जामिया तिर्मिज़ी हदीस 3513 }


    क़ुरआन पढ़ना


    lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र
    Qur'an ki tilawat, lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र 





    हज़रत अब्दुल्ला बिन अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हु फ़रमाते है, "रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलम लोगो के साथ भलाई करने में बहुत ज़्यादा सख़ी थे लेकिन रमज़ान में जब हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम आपसे मिलते तो आप और भी ज़्यादा सख़ी हो जाते। रमज़ान में जिब्रील अलैहिस्सलाम हर रात आपसे मिला करते और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान गुज़रने तक उन्हे क़ुरआन मजीद सुनाते थे। जब जिब्रील अलैहिस्सलाम आपसे मिलते तो आपकी सख़ावत तेज़ हवाओ से ज़्यादा बढ़ जाती।
    [सही बुख़ारी : 3554]

    हैज़ा औरतों की लैलतुल क़द्र मे इबादत:


    हैज़ा औ़रतें सारी इ़बादत कर सकती है सिवाय नमाज़, रोज़ा, तवाफ़ ए काबा और ऐतकाफ़ बैठने के। इन चार चीज़ों को छोड़ कर हैज़ा औरते सारी इ़बादते कर सकती हैं।
    हज़रत आयशा रज़ि अल्लाहू अन्हा फ़रमाती हैं कि एक औरत हज मे मैं हैज़ा हो गयी, तो रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "बैतुल्लाह का तवाफ़ के अलावा बाक़ी हर वो काम करो जो हाजी करता है।"
    [सही बुख़ारी : 293]
    उम्मे अतिया रज़ि अल्लाहू अन्हा फ़रमाती हैं कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हैज़ वाली औरतों को भी ई़द के रोज़ ई़दगाह जाने का हु़क्म दिया ताकि वो लोगो के तकबीरो के साथ तकबीरे कहें और उनकी दुआ़ के साथ दुआ़ करे लेकिन नमाज़ ना पढ़े।
    [सही बुख़ारी : 324]

    लैलतुल क़द्र की निशानियाँ:


    lailatul Qadr/ लैलतुल क़द्र
    Lailatul Qadr ki Dua 



    Read This: Tahajjud, Taraweeh, Qayam e lail, Shab e Qadr



    1. जिस रात lailatul Qadr की रात होगी उस के अगले दिन सूरज बिना किरण  के निकलेगा।
     [सही मुस्लिम : 2633]
    2. जिस रात लैलतुल क़द्र होगा उस रात को चांद एक प्लेट के पीस की तरह निकलेगा।
    [सही मुस्लिम : 2635]
    3. लैलतुल क़द्र की रात को ना ज़्यादा गर्मी होगी और ना ज़्यादा ठंडी होगी लेकिन वो शखावत की रात होगी और अगले सुबह सूरज कमज़ोर और लाल रंग का निकलेगा [तिब्रानी, इब्ने ख़ुज़ैमा]
    4. लैलतुल क़द्र वाले दिन को या रात को बारिश हो सकती है। [सही मुस्लिम : 2631]

    Conclusion

    रमज़ान के आख़री अशरे में lailatul Qadr की रात आती है और इन 10 दिनों में आख़री ता़क़ रातों की हमारे लिए बहुत ही बड़ी अहमियत है और लैलतुल क़द्र रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातो मैं तलाश करनी चाहिए। और इस रात यानी शब ए कद्र में कुरआन के नाज़िल होने की आग़ाज़ हुई थी। यही वजह है की लैलातुल कद्र की रात हमारे लिए बड़ी अहमियत का हामिल है और इसे इबादत, दुआएं, और मगफिरत के लिए ख़ास दिन माना जाता है।
    और इन दिनों में हमारी हर जी जान कोशिश होनी चाहिए के हम अपनी मगफिरत करवा सकें अल्लाह को राज़ी कर सकें. और अल्लाह हमारी इ़बादतों, रोज़ों और क़याम को कबूल फ़रमाये

    👍🏽        ✍🏻         📩         📤
    ˡᶦᵏᵉ    ᶜᵒᵐᵐᵉⁿᵗ    ˢᵃᵛᵉ      ˢʰᵃʳᵉ


    Frequently asked questions :

    Que: लैलतुल क़द्र क्या है ?
    Ans: लैलातुल क़द्र की रात एक ऐसी रात है जो एक हज़ार "महीनों" से बेहतर है, उस (मैं हर काम) के सर ए अंजाम देने को अपने रब के हु़क्म से फ़रिश्ते और रूह उतरते हैं, ये रात सारासर सलामती की होती है और फ़ज्र के तुलू होने तक (रहती है)।"

    Que: लैलतुल क़द्र की रात कब आती है ?
    Ans: लैलाटुल क़द्र की रात रमज़ान के आखरी अशरे में आती है और आख़री अशरे के ता़क़ रातों में यह रात होती है .

    Que: लैलतुल क़द्र की दुआ़ क्या है ?
    Ans: लैलतूल क़द्र की दुआ़ है "अल्लाह हुम्मा इन्नका अफ़ुवून तुहिब्बुल अफ़वा फअफ़ू अन्नी”
    तर्जुमा :- या अल्लाह तू मुआफ़ करने वाला है और मुआफ़ करने को पसंद करता है इसलिए मुझे मुआफ़ फ़रमा,

    Que: लैलतुल क़द्र की रात की तलाश कैसे करें ?
    Ans: लैलतुल क़द्र की रात आख़री अशरे के ता़क़ रातों में यानी 21, 23, 25, 27 और 29 की रात में तलाश करनी चाहिए !

    Que: शब ए क़द्र में क्या करना चाहिए ?
    Ans: उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा रज़ी अल्लाहो अन्हा कहती हैं के जब आख़री अशरः शुरू होता तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़मर मज़बूत कर लेते और इन रातों में जागते और अपने घर वालों को जागते ! बुखारी: 2024
    इसी लिए हमे भी इस रात इबादत में मशगूल रहना चाहिए !

    Que: इफ्तार करवाने वाले का अजर क्या है?
    Ans: जो कोई किसी रोज़ादार को इफ़्तारी करा दे तो उसको रोज़ादार के बराबर सवाब मिलेगा और रोजहदार के सावाब में कोई कमी नहीं होगी.( तिर्मिजी:807)

    Que: रोज़े का असल मक़सद क्या है ?
    Ans: सुरह बकरह में अल्लाह तआ़ला का फ़रमान है की ऐ ईमान वालों ! तुम पर रोज़े फर्ज़ किया गया जिस तरह पहले लोगों पर फर्ज़ था, ताकी तुम तक़वा अख़्तियार करो

    Que: क्या रमज़ान में शयातीन को क़ैद किया जाता है ?
    Ans: जब रमज़ान का महीना आता है तो आसमान के तमाम दरवाज़े खोल दिया जातें है,जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते है और शैतान को ज़ंजीरों से जकड़ दिया जाता है ! (मुस्लिम:2496, बुखारी:1899)

    Que: रोजदार के लिए कितनी खुशियां है ?
    Ans: रोजदार के लिए खुशी के दो मौक़ा हैं, जब वो इफ्तार करता है तो उसे खुशी हासिल होती है और जब वो अपने रब से मिलेगा तो अपने रोजों की वजह से खुश होगा.
    बुखारी: 1771

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