Shawwal ke 6 Roze /शव्वाल के 6 रोज़े
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Shawwal ke 6 Roze /शव्वाल के 6 रोज़े |
रमज़ान अल मुबारक के रोज़ों के बआ़द Shawwal ke 6 Roze /शव्वाल के 6 रोज़े रखना वाजिब नही बल्कि मुस्तहब है, और मुसलमानों के लिए मशरूअ़ है कि वो शव्वाल के 6 रोज़े रखे जिसमें फ़ज़ले अज़ीम और बहुत बड़ा अजर ओ सवाब है, क्योंकि जो शख़्स भी रमज़ान के बआ़द शव्वाल के 6 रोज़े भी रखे तो पूरे साल के रोज़े रखने का अजरो सवाब लिखा जाता है।
पूरे साल का अजर
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से भी ये साबित हैं कि Shawwal ke 6 Roze रखने से पूरे साल का अजर मिलता है।
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Shawwal ke 6 roze rakhne ka Tareeqa watch video
नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसकी शरह और तफ़सीर इस तरह ब्यान फरमाई हैं की जिसने ईदुल फ़ितर के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखे उसके पूरे साल के रोज़े हैं। (जो कोई नेकी करता है उसे उसका अजर दस गुना मिलेगा)।
(सुनन निसाई, सुनन इब्ने माजा, देखे सहीह अल तरग़ीब वा अल तारहिब (421\1)
और इब्ने ख़ुज़ैमा ने मुंदरजा ज़ेल अल्फ़ाज़ के साथ रिवायत किया है: रमज़ान उल मुबारक के रोज़े दस गुना और शव्वाल के 6 रोज़े दो माह के बराबर हैं तो इस तरह पूरे साल के रोज़े हुए हैं।
इमाम हंबल और शफ़ई इकराम ने तशरीह की हैं की:
रमज़ान उल मुबारक के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखना पूरे एक साल के फ़र्ज़ी रोज़ो के बराबर हैं वर्ना तो अमुमी तौ़र पर नफ़ली रोज़ो का अजरो सवाब ज़्यादा होना सबित है क्योंकि एक नेकी दस के बराबर हैं।
फ़िर Shawwal ke 6 Roze रखने का अहम फवाइद मैं ये भी शामिल हैं की ये रोज़े रमज़ान उल मुबारक मैं रखे गए रोज़ो की कमी ओ बेशी और नुक़्स को पूरा करते है और उसके ऐवज़ में है क्योंकि रोज़ेदार से कमी ओ बेशी हो जाती है और गुनाह भी सरज़द हो जाते हैं जो की उसके रोज़ो मैं साल्बी पहलु रखता है।
और रोज़ ए क़यामत फ़र्ज़ मैं पैदा शुदा नुक़्स नवाफ़िल से पुरा किया जाएगा जैसा कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी फ़रमाया है रोज़ ए क़यामत बंदे के आ़माल मैं सबसे पहले नमाज़ का हिसाबो किताब होगा। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया हमारा रब अज़्ज़ोवजल अपने फ़रिश्तों से फ़रमायेगा हालाकी वो ज़्यादा इल्म रखने वाला है मेरे बंदे की नमाज़ो को देखो क्या उसने पूरी की है कि उस में नुक़्स हैं, अगर मुकम्मल होगी तो मुकम्मल लिखी जायेगी और अगर इसमे कुछ कमी हुई तो अल्लाह तआ़ला फ़रमाएगा देखो मेरे बंदे के नवाफ़िल हैं अगर तो उसके नवाफ़िल होंगे तो अल्लाह तआ़ला फ़रमाएगा मेरे बंदे के फ़राइज़ (फ़र्ज़) इसके नवाफ़िल से पूरे कर दो, फ़िर बाक़ी अ़मल भी इसी तरह लिए जाएंगे। (सुनने अबु दाऊद 733)
शेख़ इब्ने उसैमीन रहमउल्लाह फ़रमाते हैं :
“ये दुरुस्त है कि कोई शख़्स शव्वाल के 6 रोज़े रखे लगातार या अलग-अलग।"
{नूर अला दर्ब नं 376}
नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसकी शरह और तफ़सीर इस तरह ब्यान फरमाई हैं की जिसने ईदुल फ़ितर के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखे उसके पूरे साल के रोज़े हैं। (जो कोई नेकी करता है उसे उसका अजर दस गुना मिलेगा)।
नेकियों का दस गुना बढ़ जाना
और एक रिवायत मैं हैं कि अल्लाह तआला एक नेकी को दस गुना करता है लिहाज़ा रमज़ानुल मुबारक का महीना दस महीनो के बराबर हुआ और 6 दिनो की रोज़े साल को पूरा करते है।(सुनन निसाई, सुनन इब्ने माजा, देखे सहीह अल तरग़ीब वा अल तारहिब (421\1)
और इब्ने ख़ुज़ैमा ने मुंदरजा ज़ेल अल्फ़ाज़ के साथ रिवायत किया है: रमज़ान उल मुबारक के रोज़े दस गुना और शव्वाल के 6 रोज़े दो माह के बराबर हैं तो इस तरह पूरे साल के रोज़े हुए हैं।
इमाम हंबल और शफ़ई इकराम ने तशरीह की हैं की:
रमज़ान उल मुबारक के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखना पूरे एक साल के फ़र्ज़ी रोज़ो के बराबर हैं वर्ना तो अमुमी तौ़र पर नफ़ली रोज़ो का अजरो सवाब ज़्यादा होना सबित है क्योंकि एक नेकी दस के बराबर हैं।
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Shawwal ke 6 Roze ke aham fawaaid
फ़िर Shawwal ke 6 Roze रखने का अहम फवाइद मैं ये भी शामिल हैं की ये रोज़े रमज़ान उल मुबारक मैं रखे गए रोज़ो की कमी ओ बेशी और नुक़्स को पूरा करते है और उसके ऐवज़ में है क्योंकि रोज़ेदार से कमी ओ बेशी हो जाती है और गुनाह भी सरज़द हो जाते हैं जो की उसके रोज़ो मैं साल्बी पहलु रखता है।
और रोज़ ए क़यामत फ़र्ज़ मैं पैदा शुदा नुक़्स नवाफ़िल से पुरा किया जाएगा जैसा कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी फ़रमाया है रोज़ ए क़यामत बंदे के आ़माल मैं सबसे पहले नमाज़ का हिसाबो किताब होगा। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया हमारा रब अज़्ज़ोवजल अपने फ़रिश्तों से फ़रमायेगा हालाकी वो ज़्यादा इल्म रखने वाला है मेरे बंदे की नमाज़ो को देखो क्या उसने पूरी की है कि उस में नुक़्स हैं, अगर मुकम्मल होगी तो मुकम्मल लिखी जायेगी और अगर इसमे कुछ कमी हुई तो अल्लाह तआ़ला फ़रमाएगा देखो मेरे बंदे के नवाफ़िल हैं अगर तो उसके नवाफ़िल होंगे तो अल्लाह तआ़ला फ़रमाएगा मेरे बंदे के फ़राइज़ (फ़र्ज़) इसके नवाफ़िल से पूरे कर दो, फ़िर बाक़ी अ़मल भी इसी तरह लिए जाएंगे। (सुनने अबु दाऊद 733)
शेख़ इब्ने उसैमीन रहमउल्लाह फ़रमाते हैं :
“ये दुरुस्त है कि कोई शख़्स शव्वाल के 6 रोज़े रखे लगातार या अलग-अलग।"
{नूर अला दर्ब नं 376}
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Conclusion:
शव्वाल इस्लामिक साल का दसवां महीना है और रमज़ान के बआ़द इस महीने की आमद होती है. इस महीने की कुछ खासियतों में से एक सबसे बड़ी खासियत ये है की शव्वाल की पहली तारिख को ही ईद मनाई जाती है. पहली शव्वाल को तुले-ए-आफताब के बआ़द थोड़ा ठहर कर ईद की नमाज़ पढ़ी जाती है.
इस तरह शव्वाल का महीने का आग़ाज़ खुशियों के साथ होता है.
शव्वाल के महीने की खास बातों में एक और खा़सियत है शव्वाल के 6 रोज़े.
रमज़ान के महीने का रोज़ा फ़र्ज़ है जो की हर मुसलमान को रखने हैं, शव्वाल का रोज़ा सुन्नत है .
अगर ईद के बाद शव्वाल के महीने में वो रोज़ेदार शव्वाल के 6 रोज़े भी रख ले तो फिर उसे पुरे साल रोज़ा रखने का अजर-ओ-सवाब मिलेगा.
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ˡᶦᵏᵉ ᶜᵒᵐᵐᵉⁿᵗ ˢᵃᵛᵉ ˢʰᵃʳᵉ
FAQs:
Que: Shawwal ke 6 Roze/शव्वाल के 6 रोज़े क्या हैं ?
Ans: जो शख़्स भी रमज़ान के रोजों के बआ़द शव्वाल के 6 रोज़े भी रखे तो पूरे साल के रोज़े रखने का अजरो सवाब लिखा जाता है।
Que: शव्वाल के रोज़े कैसे रखने हैं ?
Ans: शेख़ इब्ने उसैमीन रहमउल्लाह फ़रमाते हैं :“ये दुरुस्त है कि कोई शख़्स शव्वाल के 6 रोज़े रखे लगातार या अलग-अलग।" {नूर अला दर्ब नं 376}
Que: शव्वाल के रोज़े के अहम फवाएद क्या है ?
Ans: शव्वाल के 6 रोज़े रखने का अहम फवाइद मैं ये भी शामिल हैं की ये रोज़े रमज़ान उल मुबारक मैं रखे गए रोज़ो की कमी ओ बेशी और नुक़्स को पूरा करते है और उसके ऐवज़ में है क्योंकि रोज़ेदार से कमी ओ बेशी हो जाती है और गुनाह भी सरज़द हो जाते हैं जो की उसके रोज़ो मैं साल्बी पहलु रखता है।
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