Kya Allah Hamare Liye Kaafi Nahi?
अल्लाह तआला हर चीज़ का मालिक और सरपरस्त है। जब इंसान को मुश्किलात घेर लेती हैं, तो वह कहीं और नहीं बल्कि अल्लाह की तरफ ही रुजू करता है। क़ुरआन और हदीस में कई जगह यह बयान किया गया है कि अल्लाह अपने बंदों के लिए काफी है, और वही सबसे बेहतरीन कारसाज़ (काम बनाने वाला) है।
Kya Allah Hamare Liye Kaafi Nahi? आइए क़ुरआन, हदीस और उलमा के अक़वाल की रोशनी में जानें और अपना अकीदह दुरुस्त करें!
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➡️ अल्लाह तआला इस आयत में साफ बता रहा है कि उसका एक बंदा अगर सच्चे दिल से उस पर भरोसा करे, तो अल्लाह ही उसके लिए काफी है।
➡️ इस आयत में अल्लाह ने यकीन दिलाया कि जो भी अल्लाह पर तवक्कुल करेगा, उसे दुनिया और आखिरत की परेशानियों से निजात मिलेगी।
➡️ जब सहाबा (र.अ) को दुश्मनों ने डराने की कोशिश की, तो उन्होंने यही कहा, "हमें अल्लाह काफी है।" नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उनकी मदद की।
➡️ यह हदीस बताती है कि जो भी अल्लाह पर तवक्कुल करता है, अल्लाह उसकी मदद करता है।
➡️ यानी, सच्चा ईमान वाला इंसान हमेशा अल्लाह को ही अपना सहारा मानता है।
Á
उन्होंने कहा:
➡️ यानी, इंसान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
उन्होंने लिखा:
➡️ यानी, जो अल्लाह को अपना सहारा बना ले, वह कभी कमजोर नहीं होता।
➡️ यानी, इंसान को मेहनत भी करनी चाहिए और अल्लाह पर भरोसा भी रखना चाहिए।
जवाब: सबसे बड़ा तवक्कुल करने वाले रसूलुल्लाह (ﷺ) थे।
➡️ जब हिजरत के दौरान ग़ार-ए-सौर में हज़रत अबू बक्र (र.अ) डर रहे थे, तो नबी (ﷺ) ने फ़रमाया:
"لا تحزن إن الله معنا""ग़म न करो, अल्लाह हमारे साथ है।" (सूरह अत-तौबा 9:40)
➡️ अल्लाह ने उनकी मदद की और दुश्मन उन्हें नहीं देख सके।
(1) अल्लाह अपने बंदों के लिए काफी है
अल्लाह सुबहा़न व तआ़ला का फ़रमान है किأَلَيْسَ اللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُ؟"क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं है?"सूरह अज़-ज़ुमर (39:36)
➡️ अल्लाह तआला इस आयत में साफ बता रहा है कि उसका एक बंदा अगर सच्चे दिल से उस पर भरोसा करे, तो अल्लाह ही उसके लिए काफी है।
(2) जो अल्लाह पर भरोसा करे, अल्लाह उसे काफी हो जाता है
सूरह अत-तलाक़ (65:3)وَمَن يَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ فَهُوَ حَسْبُهُ"और जो कोई अल्लाह पर भरोसा करे, तो अल्लाह उसे काफी है।"
➡️ इस आयत में अल्लाह ने यकीन दिलाया कि जो भी अल्लाह पर तवक्कुल करेगा, उसे दुनिया और आखिरत की परेशानियों से निजात मिलेगी।
(3) अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को डरने की जरूरत नहीं
सूरह अली-इमरान (3:173)حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ"अल्लाह हमारे लिए काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़ है।"
➡️ जब सहाबा (र.अ) को दुश्मनों ने डराने की कोशिश की, तो उन्होंने यही कहा, "हमें अल्लाह काफी है।" नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उनकी मदद की।
(1) अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी मायूसी नहीं होती
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:"अगर तुम सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करो, जैसा कि भरोसा करने का हक़ है, तो वह तुम्हें उसी तरह रिज़्क देगा जैसे परिंदों को देता है। वे सुबह खाली पेट निकलते हैं और शाम को भर पेट लौटते हैं।"(तिर्मिज़ी: 2344)
➡️ यह हदीस बताती है कि जो भी अल्लाह पर तवक्कुल करता है, अल्लाह उसकी मदद करता है।
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रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:
(2) सुबह-शाम की दुआ: "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील"
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:
"जो सुबह और शाम सात बार यह कहे: हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील, नि’मल मौला व नि’मन नसीर (अल्लाह हमें काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़, बेहतरीन मददगार और बेहतरीन सहारा देने वाला है), तो अल्लाह उसकी हर परेशानी दूर कर देगा।"(अबू दाऊद: 5081)➡️ यह दुआ पढ़ने से अल्लाह की मदद हासिल होती है।
3. फ़ुक़हा और उलमा के अक़वाल
(1) इमाम इब्न कसीर (रह.)
उन्होंने अपनी तफ़सीर में लिखा:"जिसने अल्लाह पर भरोसा किया, उसने सबसे मजबूत सहारा पकड़ लिया। और जिसने अल्लाह को ही अपना मददगार बनाया, उसके लिए दुनिया की कोई ताकत नुकसान नहीं पहुँचा सकती।"(तफ़सीर इब्न कसीर, 65:3)
➡️ यानी, सच्चा ईमान वाला इंसान हमेशा अल्लाह को ही अपना सहारा मानता है।
Á
(2) इमाम अल-ग़ज़ाली (रह.)
उन्होंने कहा:
"अल्लाह तआला पर तवक्कुल करना यह है कि इंसान अपने दिल से हर तरह के डर और चिंता को निकाल कर सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करे, और यह यकीन रखे कि वही उसके लिए काफी है।"(इह्या उलूमिद्दीन, जिल्द 4)
➡️ यानी, इंसान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
(3) इब्न तैमिय्या (रह.)
उन्होंने लिखा:
"जो भी अपने दिल को सिर्फ अल्लाह के हवाले कर देता है, उसे दुनिया की कोई ताकत हिला नहीं सकती, क्योंकि वह सबसे मजबूत सहारा पकड़ चुका होता है।"(मजमूअ अल-फतावा, 10/40)
➡️ यानी, जो अल्लाह को अपना सहारा बना ले, वह कभी कमजोर नहीं होता।
(4) इमाम नववी (रह.)
उन्होंने कहा:"सच्चा तवक्कुल यह नहीं कि इंसान कोशिश छोड़ दे, बल्कि यह है कि इंसान हर कोशिश करे, लेकिन दिल से सिर्फ अल्लाह पर भरोसा रखे।"(रियादुस-सालिहीन, हदीस 62)
➡️ यानी, इंसान को मेहनत भी करनी चाहिए और अल्लाह पर भरोसा भी रखना चाहिए।
तवक्कुल का मतलब यह नहीं कि इंसान कोशिश छोड़ दे, बल्कि यह कि वह कोशिश के साथ-साथ अल्लाह पर भरोसा रखे।
अल्लाह हमें भी अपना भरोसा मजबूत करने की तौफीक दे। आमीन!
क़ुरआन और हदीस से यह वाजेह होता है कि अल्लाह अपने बंदों के लिए काफी है।अब भी ज़हन में ये सवाल है की Kya Allah Hamare Liye Kaafi Nahi ? अल्लाह ही हर चीज़ का मालिक और मददगार है।जो अल्लाह पर भरोसा करता है, वह कभी मायूस नहीं होता।जो अल्लाह को अपना सहारा बनाता है, दुनिया की कोई ताकत उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकती।
Conclusion:
क़ुरआन और हदीस से यह वाजेह होता है कि अल्लाह अपने बंदों के लिए काफी है।अब भी ज़हन में ये सवाल है की Kya Allah Hamare Liye Kaafi Nahi ? अल्लाह ही हर चीज़ का मालिक और मददगार है।जो अल्लाह पर भरोसा करता है, वह कभी मायूस नहीं होता।जो अल्लाह को अपना सहारा बनाता है, दुनिया की कोई ताकत उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकती।
अल्लाह ही हमारे लिए काफी है। हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और हर हाल में "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" कहना चाहिए। तवक्कुल का मतलब कोशिश छोड़ना नहीं, बल्कि कोशिश करने के बाद नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना है।
अल्लाह हमें भी सच्चा तवक्कुल करने की तौफीक दे। आमीन!:
अगर कोई अल्लाह पर भरोसा रखे, तो वह उसे कभी मायूस नहीं करता।
अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करने से इंसान की मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
रसूलुल्लाह (ﷺ) और सहाबा (र.अ) भी हमेशा यही कहते थे: "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील"
अल्लाह तआला हमें भी अपना भरोसा मजबूत करने की तौफीक दे। आमीन!
सवाल 1: अल्लाह का बंदों के लिए "काफी" होने का क्या मतलब है?
जवाब: "अल्लाह का बंदों के लिए काफी" होने का मतलब यह है कि वह अपने बंदों की हर जरूरत पूरी करने वाला है। अगर इंसान सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करे, तो उसे किसी और के सहारे की जरूरत नहीं होती। क़ुरआन में आया है:
أَلَيْسَ اللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُ؟"क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं?" (सूरह अज़-ज़ुमर 39:36)
सवाल 2: क्या सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब यह है कि हमें कोशिश नहीं करनी चाहिए?
जवाब: नहीं, इस्लाम में कोशिश करना भी जरूरी है और अल्लाह पर भरोसा रखना भी। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:"अपने ऊंट को बाँधो और फिर अल्लाह पर भरोसा करो।" (तिर्मिज़ी: 2517)
➡️ इसका मतलब यह है कि इंसान को अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन रिज़ल्ट अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
सवाल 3: तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) करने के क्या फायदे हैं?
जवाब: अल्लाह मदद करता है:"जो अल्लाह पर भरोसा करे, अल्लाह उसे काफी होता है।" (सूरह अत-तलाक़ 65:3)
डर और ग़म खत्म हो जाता है।
इंसान को सुकून मिलता है।
अल्लाह उसकी मुश्किलें आसान कर देता है।
सवाल 4: सहाबा (र.अ) ने मुश्किल वक्त में अल्लाह पर कैसे भरोसा किया?
जवाब: जब सहाबा (र.अ) को दुश्मनों ने डराने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा:
"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" (अल्लाह हमारे लिए काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़ है)। (सूरह अली-इमरान 3:173)
➡️ इसके बाद अल्लाह ने उनकी मदद की और उन्हें जीत हासिल हुई।
सवाल 5: क्या कोई दुआ है जिससे अल्लाह की मदद हासिल हो?
जवाब: हाँ, यह दुआ बहुत असरदार है:
"حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ، نِعْمَ الْمَوْلَى وَنِعْمَ النَّصِيرُ""अल्लाह हमारे लिए काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़, बेहतरीन मददगार और बेहतरीन सहारा देने वाला है।" (अबू दाऊद: 5081)
➡️ इसे सुबह और शाम 7 बार पढ़ने से अल्लाह की मदद मिलती है।
सवाल 6: अगर किसी को तवक्कुल में कमजोरी महसूस हो तो वह क्या करे?
जवाब: क़ुरआन की आयतें पढ़े जो तवक्कुल की ताकत देती हैं।
हदीसों का मुताला करे (पढ़े) जो अल्लाह पर भरोसे की अहमियत बताती हैं।
हर हाल में "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" कहे।
अच्छे लोगों की सोहबत (साथ) में रहे जो अल्लाह पर भरोसा रखने वाले हों।
अल्लाह से दुआ करे कि उसका भरोसा मजबूत हो।
सवाल 7: क्या अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब यह है कि इंसान किसी और से मदद न मांगे?
जवाब: नहीं, इस्लाम में इंसान को हलाल तरीके से कोशिश करने की इजाजत है। अगर किसी को डॉक्टर, दोस्त या किसी और से मदद लेनी हो तो ले सकता है, लेकिन दिल से यकीन सिर्फ अल्लाह पर होना चाहिए।
➡️ जैसे रसूलुल्लाह (ﷺ) ने भी इलाज कराया, लेकिन तवक्कुल सिर्फ अल्लाह पर रखा।
सवाल 8: अगर कोई ग़म में हो तो अल्लाह पर तवक्कुल कैसे करे?
जवाब: अल्लाह से खूब दुआ करे।
क़ुरआन की तिलावत करे, खास तौर पर सूरह अज़-ज़ुमर (39:36) और सूरह अत-तलाक़ (65:3)।
हदीसों में आई हुई तवक्कुल की बातें याद करे।
"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" ज्यादा से ज्यादा पढ़े।
➡️ इससे अल्लाह के साथ मजबूत रिश्ता बनेगा और ग़म दूर हो जाएगा।
सवाल 9: क्या तवक्कुल का मतलब है कि इंसान को मुश्किलें नहीं आएंगी?
जवाब: नहीं, मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन जो तवक्कुल करता है, उसे अल्लाह मुश्किलों से निकालता है।
➡️ जैसे हज़रत इब्राहीम (अ.स) को आग में डाला गया, लेकिन उन्होंने कहा:"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" और अल्लाह ने आग को ठंडा कर दिया।
सवाल 10: सबसे बड़ा तवक्कुल करने वाला कौन था?
अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करने से इंसान की मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
रसूलुल्लाह (ﷺ) और सहाबा (र.अ) भी हमेशा यही कहते थे: "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील"
अल्लाह तआला हमें भी अपना भरोसा मजबूत करने की तौफीक दे। आमीन!
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FAQs:
जवाब: "अल्लाह का बंदों के लिए काफी" होने का मतलब यह है कि वह अपने बंदों की हर जरूरत पूरी करने वाला है। अगर इंसान सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करे, तो उसे किसी और के सहारे की जरूरत नहीं होती। क़ुरआन में आया है:
أَلَيْسَ اللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُ؟"क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं?" (सूरह अज़-ज़ुमर 39:36)
सवाल 2: क्या सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब यह है कि हमें कोशिश नहीं करनी चाहिए?
जवाब: नहीं, इस्लाम में कोशिश करना भी जरूरी है और अल्लाह पर भरोसा रखना भी। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:"अपने ऊंट को बाँधो और फिर अल्लाह पर भरोसा करो।" (तिर्मिज़ी: 2517)
➡️ इसका मतलब यह है कि इंसान को अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन रिज़ल्ट अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
सवाल 3: तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) करने के क्या फायदे हैं?
जवाब: अल्लाह मदद करता है:"जो अल्लाह पर भरोसा करे, अल्लाह उसे काफी होता है।" (सूरह अत-तलाक़ 65:3)
डर और ग़म खत्म हो जाता है।
इंसान को सुकून मिलता है।
अल्लाह उसकी मुश्किलें आसान कर देता है।
सवाल 4: सहाबा (र.अ) ने मुश्किल वक्त में अल्लाह पर कैसे भरोसा किया?
जवाब: जब सहाबा (र.अ) को दुश्मनों ने डराने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा:
"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" (अल्लाह हमारे लिए काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़ है)। (सूरह अली-इमरान 3:173)
➡️ इसके बाद अल्लाह ने उनकी मदद की और उन्हें जीत हासिल हुई।
सवाल 5: क्या कोई दुआ है जिससे अल्लाह की मदद हासिल हो?
जवाब: हाँ, यह दुआ बहुत असरदार है:
"حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ، نِعْمَ الْمَوْلَى وَنِعْمَ النَّصِيرُ""अल्लाह हमारे लिए काफी है, और वह बेहतरीन कारसाज़, बेहतरीन मददगार और बेहतरीन सहारा देने वाला है।" (अबू दाऊद: 5081)
➡️ इसे सुबह और शाम 7 बार पढ़ने से अल्लाह की मदद मिलती है।
सवाल 6: अगर किसी को तवक्कुल में कमजोरी महसूस हो तो वह क्या करे?
जवाब: क़ुरआन की आयतें पढ़े जो तवक्कुल की ताकत देती हैं।
हदीसों का मुताला करे (पढ़े) जो अल्लाह पर भरोसे की अहमियत बताती हैं।
हर हाल में "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" कहे।
अच्छे लोगों की सोहबत (साथ) में रहे जो अल्लाह पर भरोसा रखने वाले हों।
अल्लाह से दुआ करे कि उसका भरोसा मजबूत हो।
सवाल 7: क्या अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब यह है कि इंसान किसी और से मदद न मांगे?
जवाब: नहीं, इस्लाम में इंसान को हलाल तरीके से कोशिश करने की इजाजत है। अगर किसी को डॉक्टर, दोस्त या किसी और से मदद लेनी हो तो ले सकता है, लेकिन दिल से यकीन सिर्फ अल्लाह पर होना चाहिए।
➡️ जैसे रसूलुल्लाह (ﷺ) ने भी इलाज कराया, लेकिन तवक्कुल सिर्फ अल्लाह पर रखा।
सवाल 8: अगर कोई ग़म में हो तो अल्लाह पर तवक्कुल कैसे करे?
जवाब: अल्लाह से खूब दुआ करे।
क़ुरआन की तिलावत करे, खास तौर पर सूरह अज़-ज़ुमर (39:36) और सूरह अत-तलाक़ (65:3)।
हदीसों में आई हुई तवक्कुल की बातें याद करे।
"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" ज्यादा से ज्यादा पढ़े।
➡️ इससे अल्लाह के साथ मजबूत रिश्ता बनेगा और ग़म दूर हो जाएगा।
सवाल 9: क्या तवक्कुल का मतलब है कि इंसान को मुश्किलें नहीं आएंगी?
जवाब: नहीं, मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन जो तवक्कुल करता है, उसे अल्लाह मुश्किलों से निकालता है।
➡️ जैसे हज़रत इब्राहीम (अ.स) को आग में डाला गया, लेकिन उन्होंने कहा:"हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील" और अल्लाह ने आग को ठंडा कर दिया।
सवाल 10: सबसे बड़ा तवक्कुल करने वाला कौन था?
जवाब: सबसे बड़ा तवक्कुल करने वाले रसूलुल्लाह (ﷺ) थे।
➡️ जब हिजरत के दौरान ग़ार-ए-सौर में हज़रत अबू बक्र (र.अ) डर रहे थे, तो नबी (ﷺ) ने फ़रमाया:
"لا تحزن إن الله معنا""ग़म न करो, अल्लाह हमारे साथ है।" (सूरह अत-तौबा 9:40)
➡️ अल्लाह ने उनकी मदद की और दुश्मन उन्हें नहीं देख सके।
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