Jahannum me Auraten Zayadah kyun ?
यह समझना और जानना बहुत जरूरी है कि Jahannum me Auraten Zayadah kyun होंगी? यह हदीस नबी करीम ﷺ की एक महत्वपूर्ण नसीहत पर आधारित है, जिसमें आपने जन्नत और जहन्नम का नज़ारा किया और उनमें मौजूद लोगों की अधिकता के बारे में बताया। इस हदीस में खासतौर पर जहन्नम में औरतों की अधिक संख्या का ज़िक्र किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कुछ आदतें और कर्म इंसान के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इस हदीस का उद्देश्य औरतों को हतोत्साहित करना नहीं, बल्कि उनके सुधार की ओर ध्यान दिलाना है ताकि वे ऐसे कार्य करें जो उन्हें जन्नत के करीब ले जाएं और जहन्नम से दूर रखें।फ़रमान-ए-बारी तआला है:"ऐ ईमान वालो! अपने आप को और अपने एहल-ओ-ऐयाल को जहन्नुम की आग से बचाओ।"(अत-तहरीम: 6)
हमे खुद जहन्नम से बचने की कोशिश करनी चाहिए और अपने एहल-ओ-ऐयाल को भी बचाने के लिए नसीहत करती रहनी चाहिए!
आइए अब उस हदीस की तरफ़ जिस में बताया गया है कि Jahannum me Auraten Zayadah kyun होंगी? यह हदीस सही बुखारी और सही मुस्लिम में अलग-अलग शब्दों के साथ वर्णित है।
इसमें नबी करीम ﷺ ने जन्नत और जहन्नम में झांकने का ज़िक्र किया और फ़रमाया कि जहन्नम में औरतों की संख्या अधिक है। इस हदीस की व्याख्या और विस्तार नीचे दिए गए बिंदुओं की रोशनी में किया जा सकता है:
इसमें नबी करीम ﷺ ने जन्नत और जहन्नम में झांकने का ज़िक्र किया और फ़रमाया कि जहन्नम में औरतों की संख्या अधिक है। इस हदीस की व्याख्या और विस्तार नीचे दिए गए बिंदुओं की रोशनी में किया जा सकता है:
1. हदीस के शब्द और संदर्भ
यह हदीस हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास, हज़रत इमरान बिन हुसैन और हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित है। नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया:
"मैंने जहन्नम में झांका तो उसमें ज़्यादातर औरतें थीं।"
(सही बुखारी: 3241, सही मुस्लिम: 2737)
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2. औरतों की अधिक संख्या का कारण
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Jahannum me Auraten Zayadah kyun ? |
नबी करीम ﷺ ने इस हदीस में जहन्नम में औरतों की अधिकता का ज़िक्र किया, लेकिन इसकी वजहें भी दूसरी हदीसों में बयान की हैं। इनमें निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
(अ) पति की नाशुक्री और बदज़ुबानी
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:"मैंने जहन्नम में ज़्यादा संख्या औरतों की देखी क्योंकि वे नाशुक्री करती हैं।"
सहाबा-ए-किराम ने पूछा: या रसूलल्लाह! क्या वे अल्लाह की नाशुक्री करती हैं?
आप ﷺ ने फ़रमाया:
"नहीं, बल्कि वे अपने पति की नाशुक्री करती हैं और एहसान फरामोशी करती हैं। यदि तुम उनमें से किसी के साथ जीवनभर भलाई करते रहो और एक दिन कुछ कमी रह जाए, तो वे तुरंत कह देती हैं कि तुमने कभी मेरे साथ भलाई नहीं की।"(सही बुखारी: 29)
(ब) ज़्यादा शिकायत और नाशुक्री करना
औरतों में यह स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे छोटी-छोटी बातों पर जल्दी नाराज़ हो जाती हैं और कई बार जरूरत से ज़्यादा शिकायत करने लगती हैं। कभी-कभी यह गुण इंसान के ईमान को कमज़ोर कर देता है और आखिरत में नुकसान का कारण बन सकता है।
(स) फितना और आज़माइश का ज़रिया बनना
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया:"मैंने अपने बाद मर्दों के लिए सबसे बड़ा फितना औरतों को पाया।"
(सही बुखारी: 5096, सही मुस्लिम: 2740)
अर्थात्, औरतों की सुंदरता और उनके गलत रवैये कई बार मर्दों को गुनाह की ओर खींच लेते हैं, जिससे समाज में नैतिक बुराइयाँ बढ़ जाती हैं।
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3. क्या औरतों के लिए नजात (बचाव) संभव है?
यह समझना ज़रूरी है कि यह हदीस औरतों को निराश करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुधार और मार्गदर्शन के लिए है। जन्नत और जहन्नम में दाख़िला केवल लिंग (Gender) के आधार पर नहीं, बल्कि कर्मों के आधार पर होगा। अगर औरतें नेक अमल करें, शुक्रगुज़ार बनें, अपने पति और रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करें और दीन पर अमल करें, तो वे भी जन्नत की हकदार होंगी।4. औरतों के लिए जन्नत के रास्ते
हदीसों में उन औरतों की विशेषताओं का भी उल्लेख किया गया है जो जन्नत में जाएँगी, जैसे:(अ) नमाज़, रोज़ा और पति की आज्ञापालन
नबी ﷺ ने फ़रमाया:"अगर औरत पाँच वक्त की नमाज़ पढ़े, रमज़ान के रोज़े रखे, अपनी इज्ज़त की हिफ़ाज़त करे और अपने पति की आज्ञापालन करे, तो वह जन्नत में दाख़िल होगी।"(मुसनद अहमद: 1661)
(ब) दरियादिली, सब्र और हया
अगर औरतें शुक्रगुज़ारी, सब्र और अच्छे अख़लाक़ को अपनाएँ, तो उनके लिए जन्नत के दरवाज़े खुले हैं।Conclusion:
Jahannum me Auraten Zayadah kyun हैं ये बात एक हद तक समझ में आ गई होगी! यह हदीस औरतों के खिलाफ़ नहीं, बल्कि उनकी सुधार के लिए है। असली मकसद यह है कि औरतें उन बुराइयों से बचें, जिनका हदीस में ज़िक्र किया गया है, और वे ऐसे कर्म करें जो उन्हें जन्नत के करीब ले जाएँ। यह हदीस दरअसल एक नसीहत है कि हर इंसान, चाहे वह मर्द हो या औरत, उसे अपने कर्मों की इस्लामी तालीम के अनुसार सुधार करना चाहिए ताकि वह जहन्नम से बचकर जन्नत का हक़दार बन सके।
यह हदीस एक चेतावनी है कि इंसान को अपने कर्मों को सुधारना चाहिए और जन्नत के रास्ते को अपनाना चाहिए। इस्लाम में औरतों का बहुत ऊँचा दर्जा है, और अगर वे नेक कर्म करें तो वे भी जन्नत की हक़दार होंगी।
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FAQs:
प्रश्न 1: क्या यह हदीस साबित करती है कि औरतें मर्दों की तुलना में कमतर हैं?उत्तर: नहीं, इस्लाम में औरत और मर्द में दर्जे का कोई अंतर नहीं, बल्कि इंसान को उसके कर्मों के आधार पर इनाम या सज़ा दी जाती है। यह हदीस औरतों को हतोत्साहित करने के लिए नहीं, बल्कि उनके सुधार के लिए है ताकि वे उन कर्मों से बचें जो उन्हें जहन्नम की ओर ले जा सकते हैं।
प्रश्न 2: औरतों के जहन्नम में अधिक होने के कारण क्या हैं?
उत्तर: नबी करीम ﷺ ने इसके दो मुख्य कारण बताए हैं:
1. अपने शौहर (पति) की नाशुक्री और एहसान फरामोशी करना।
2. ज़्यादा शिकायतें करना और जुबान का गलत इस्तेमाल करना, जिससे कभी-कभी गुनाहों का रास्ता खुल जाता है।
प्रश्न 3: क्या औरतों के लिए जन्नत के रास्ते खुले हैं?
उत्तर: जी हां, अगर औरतें नेक कर्म करें, नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, हया और सब्र को अपनाएं, तो उनके लिए जन्नत के दरवाज़े खुले हैं। नबी ﷺ ने फरमाया कि जो औरत नमाज़ पढ़े, रोज़ा रखे, अपनी इज्ज़त की हिफ़ाज़त करे और अपने शौहर की फरमाबरदारी करे, वह जन्नत में दाखिल होगी।
प्रश्न 4: क्या सिर्फ औरतें ही जहन्नम में अधिक होंगी?
उत्तर: नहीं, मर्दों में भी वे लोग जो गुनाह करते हैं, जहन्नम में जाएंगे। हदीस में बताए गए गुनाह सिर्फ औरतों पर ही लागू नहीं होते, बल्कि मर्द भी अगर गलत कर्म करें तो वे भी सज़ा के हकदार होंगे।
प्रश्न 5: औरतें जहन्नम से कैसे बच सकती हैं?
उत्तर: औरतें इन चीज़ों पर अमल करके जहन्नम से बच सकती हैं:
अपनी जुबान और रवैये की इस्लामी शिक्षा के अनुसार सुधार करना।
शुक्रगुज़ारी और सब्र को अपनाना।
नमाज़ और रोज़े की पाबंदी करना।
अपने शौहर, मां-बाप और रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करना।
अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की हिदायतों पर अमल करना।:
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